भारतीय सांस्कृतिक धरोहर एवं तीर्थ संरक्षण मिशन

मंदिर व ऐतिहासिक इमारतें संरक्षण अभियान

“धरोहर की रक्षा, संस्कृति की सुरक्षा, राष्ट्र का गौरव”

भारत की आत्मा उसके प्राचीन मंदिरों, ऐतिहासिक वास्तुकला और तीर्थ स्थलों में बसती है। युगभारती इन्द्रप्रस्थ फाउन्डेशन समाज के सहयोग से देश के उपेक्षित देवालयों, प्राचीन स्मारकों, बावड़ियों एवं तीर्थ स्थलों के वैज्ञानिक जीर्णोद्धार, नियमित स्वच्छता संवर्धन और सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने हेतु पूर्ण निष्ठा से समर्पित है।

पारंपरिक पाषाण व वास्तु शिल्प संरक्षण जनसहभागिता एवं निरंतर तीर्थ स्वच्छता सरोवर, बावड़ी व जल तीर्थ पुनरुद्धार
120+
संरक्षित एवं जीर्णोद्धार मंदिर

Temples Restored

45+
तीर्थ स्वच्छता अभियान

Heritage Cleanliness Drives

50,000+
सहभागी श्रद्धालु व स्वयंसेवक

Volunteers & Devotees

18+
तीर्थ सेवा व सुविधा केंद्र

Pilgrim Facilitation Desks

हमारे मुख्य आयाम

मंदिर एवं धरोहर संरक्षण के चार मुख्य स्तंभ

1. प्राचीन मंदिर जीर्णोद्धार एवं वास्तु संरक्षण

उपेक्षित व जीर्ण-शीर्ण देवालयों का पारंपरिक नागर, द्रविड़ व स्थानीय वास्तुशिल्प के अनुरूप वैज्ञानिक जीर्णोद्धार।

  • पारंपरिक पाषाण व चूना तकनीक
  • मूल वास्तुकला की अक्षुण्णता

2. तीर्थ स्वच्छता एवं पर्यावरण संवर्धन

ऐतिहासिक तीर्थों, मंदिर परिसरों व पावन सरोवरों में नियमित स्वच्छता और प्लास्टिक-मुक्त हरित अभियान।

  • पावन घाट व सरोवर जल स्वच्छता
  • ठोस कचरा प्रबंधन एवं हरित परिसर

3. ऐतिहासिक अनुसंधान एवं अभिलेखीकरण

लुप्तप्राय शिलालेखों, मंदिर इतिहास, लोक गाथाओं का प्रामाणिक शोध, प्रलेखीकरण व डिजिटल आर्काइव।

  • प्राचीन पांडुलिपि व शिलालेख शोध
  • डिजिटल संग्रहालय व संदर्भ प्रकाशन

4. तीर्थ यात्री सेवा एवं सुलभ व्यवस्था

दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं हेतु सुगम दर्शन, विश्रामालय, शुद्ध पेयजल व प्राथमिक चिकित्सा सहायता।

  • निःशुल्क अन्नक्षेत्र व जल सेवा
  • प्राथमिक उपचार व सुरक्षा प्रबंधन
हमारी कार्यप्रणाली

सर्वेक्षण से पुनरुद्धार तक (4-Step Conservation Roadmap)

01

सर्वेक्षण एवं पुरातत्वीय मूल्यांकन

प्राचीन मंदिर संरचना, ऐतिहासिक महत्व और तत्काल मरम्मत आवश्यकताओं का वैज्ञानिक व तकनीकी सर्वेक्षण।

02

पारंपरिक स्थापत्य संरक्षण योजना

अनुभवी स्थपतियों व वास्तु शिल्पकारों के मार्गदर्शन में मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए संरक्षण कार्ययोजना।

03

सामुदायिक सहभागिता व श्रमदान

स्थानीय समाज, मंदिर प्रबंध समिति एवं स्वयंसेवकों के साथ मिलकर सामूहिक श्रमदान और चरणबद्ध पुनरुद्धार।

04

सतत प्रबंधन एवं सांस्कृतिक जागरण

नियमित रख-रखाव, दैनंदिन पूजा-अर्चना की पुनर्बहाली, उत्सवों का आयोजन और युवा पीढ़ी में गौरव का संचार।

संसाधन एवं अवसंरचना

धरोहर संरक्षण अवसंरचना व सुविधाएं

पुरातत्वीय 3D सर्वेक्षण व मैपिंग

संरचनात्मक स्थिरता विश्लेषण और डिजिटल आर्काइविंग हेतु अत्याधुनिक लेजर व 3D स्कैनिंग उपकरण।

पारंपरिक पाषाण व काष्ठ शिल्पशाला

कुशल मूर्तिकारों और वास्तु शिल्पियों द्वारा पारंपरिक नक्काशी, पाषाण तराशी व जीर्णोद्धार कार्य।

प्राचीन जल कुंड व बावड़ी पुनर्जीवन

ऐतिहासिक जलस्रोतों, बावड़ियों एवं तीर्थ सरोवरों की गाद सफाई, प्राकृतिक जल शोधन व संरक्षण।

पर्यावरण-अनुकूल हरित तीर्थ परिसर

सौर ऊर्जा संयंत्र, जैविक अपशिष्ट प्रबंधन, वृक्षारोपण और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) व्यवस्था।

धरोहर शोध व संदर्भ पुस्तकालय

प्राचीन इतिहास, वास्तुशास्त्र, शिलालेखों एवं स्थानीय सांस्कृतिक पांडुलिपियों का समृद्ध अभिलेख संग्रह।

श्रद्धालु विश्राम व सुविधा केंद्र

तीर्थ यात्रियों के लिए स्वच्छ विश्रामालय, शीतल पेयजल, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा व मार्गदर्शन केंद्र।

जिज्ञासा समाधान

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

नहीं, युगभारती विशेष रूप से उन ग्रामीण व उपेक्षित प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों पर ध्यान केंद्रित करती है जो पुरातत्व विभाग की सूची में नहीं हैं और देखरेख के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हो रहे हैं। हम स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर ऐसे देवालयों का संरक्षण करते हैं।

हम आधुनिक कंक्रीट के अत्यधिक उपयोग के स्थान पर पारंपरिक निर्माण सामग्री (जैसे चूना-सुर्खी, प्राकृतिक पत्थर, पारंपरिक गोंद मिश्रण) और अनुभवी पारंपरिक वास्तु शिल्पियों (Architects) की देखरेख में कार्य करते हैं, जिससे मूल स्थापत्य को कोई क्षति न पहुंचे।

जी हाँ, यदि आपके क्षेत्र में कोई प्राचीन व उपेक्षित मंदिर या बावड़ी है, तो आप हमारी वेबसाइट के 'संपर्क करें' फॉर्म अथवा हेल्पलाइन के माध्यम से मंदिर की तस्वीरें, स्थान व विवरण भेजकर प्राथमिक सर्वेक्षण का अनुरोध कर सकते हैं।

आप सप्ताहांत तीर्थ स्वच्छता अभियानों, इतिहास शोध, छायांकन, जन-जागरूकता या भौतिक श्रमदान के माध्यम से हमारे साथ जुड़ सकते हैं। इसके लिए आप हमारे 'संपर्क करें' पेज पर जाकर स्वयंसेवक के रूप में पंजीकरण कर सकते हैं।

जी हाँ, युगभारती इन्द्रप्रस्थ फाउन्डेशन आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80G के अंतर्गत पंजीकृत गैर-लाभकारी NGO है, अतः सभी पात्र दानों पर कर छूट की अधिकृत रसीद तुरंत प्रदान की जाती है।

अपनी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में भागीदार बनें

भारतीय संस्कृति और ऐतिहासिक देवालयों के जीर्णोद्धार हेतु आज ही युगभारती धरोहर रक्षा अभियान से जुड़ें।

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