पंडित दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय (कानपुर) की स्थापना पूज्य 'बूजी' (श्रीमती सुशीला नरेंद्रजीत सिंह) द्वारा दीनदयाल जी के उदात्त, त्यागमय और समाजोन्मुखी जीवन-मूल्यों को सहेजने के संकल्प के साथ की गई थी। विद्यालय से शिक्षा प्राप्त पूर्व छात्र जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अपनी कर्मभूमि बनाने पहुँचे, तो उन्होंने इसी विचार-धारा को संस्थागत रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया। इसी प्रेरणा से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में समाज कल्याण, रचनात्मक विमर्श और राष्ट्र-सरोकारों के विस्तार हेतु 'युगभारती इंद्रप्रस्थ फाउंडेशन' की स्थापना, विद्यालय के पूर्व छात्रों द्वारा की गई है।
यह फाउंडेशन राजधानी क्षेत्र में निवास कर रहे प्रबुद्ध पूर्व छात्रों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और समाजसेवियों को एक साझा मंच प्रदान करता है। संस्था का मुख्य उद्देश्य केवल वैचारिक विमर्श तक सीमित न रहकर शिक्षा के संवर्धन, व्यावसायिक कौशल विकास (Skill Development), स्वास्थ्य सेवाओं, निर्धन व वंचित वर्गों के कल्याण, महिला सशक्तीकरण तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे जमीनी सरोकारों पर व्यावहारिक कार्य करना है। राजधानी के केंद्र में स्थित होने के कारण यह प्रकल्प विभिन्न सामाजिक संगठनों, गैर-लाभकारी संस्थाओं और विशेषज्ञों के मध्य समन्वय स्थापित कर राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावकारी पहल करने की भूमिका निभाता है।
फाउंडेशन का चरम लक्ष्य संस्थापक विचारकों के इस दृढ़ संकल्प—'एक दीनदयाल गया तो क्या, हम अनेक दीनदयाल बनाएंगे'—को यथार्थ में रूपांतरित करना है। समाज में व्याप्त विभ्रम और संकीर्णताओं को दूर करते हुए ऐसे समर्पित, सेवाभावी और क्षमतावान व्यक्तित्वों का निर्माण करना, जो अपनी विशेषज्ञता का उपयोग समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान में कर सकें। दिल्ली के इस मंच से योजनाएँ बनाकर भारत के सुदूर ग्राम-ग्राम को प्रगति, आत्मनिर्भरता और 'परम वैभव' तक पहुँचाने के लिए निरंतर योगदान देना ही युगभारती इंद्रप्रस्थ फाउंडेशन का मूल ध्येय है।